गाइड
मॉइस्चराइज़र कैसे चुनें, और क्या ऑयली स्किन को भी चाहिए?
मॉइस्चराइज़र स्किन की सबसे बाहरी परत में पानी रोककर रखता है और उन लिपिड्स को सहारा देता है जो इस परत को जोड़े रखते हैं। स्वस्थ स्किन बैरियर कम पानी खोता है, बाहरी चीज़ों पर कम प्रतिक्रिया करता है और सीरम जैसे स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट्स को बेहतर सहता है। इसलिए स्किन टाइप कोई भी हो, मॉइस्चराइज़र रूटीन के तीन बुनियादी प्रोडक्ट्स में से एक है।
रूटीन में इसकी जगह
- साफ़ करें
- संतुलित करें
- ट्रीट करें
- नमी दें
- सुरक्षा करें
मॉइस्चराइज़र कैसे काम करता है?
अच्छा मॉइस्चराइज़र आम तौर पर तीन तरह के इंग्रीडिएंट्स को मिलाता है। ह्यूमेक्टेंट पानी को अपनी ओर खींचकर बाँधते हैं: ग्लिसरीन, हायल्यूरोनिक एसिड, यूरिया और पैंथेनॉल इसी समूह में हैं। इमोलिएंट कोशिकाओं के बीच की जगह भरकर स्किन को मुलायम बनाते हैं, जैसे स्क्वालेन, वनस्पति तेल और सेरामाइड। ऑक्लूसिव स्किन पर एक पतली परत बनाकर पानी के उड़ने की रफ़्तार धीमी करते हैं: पेट्रोलियम जेली, डाइमेथिकोन और शिया बटर इसके उदाहरण हैं।
ड्राई स्किन को ऑक्लूसिव इंग्रीडिएंट्स से ज़्यादा फ़ायदा होता है, जबकि ऑयली स्किन ह्यूमेक्टेंट से भरपूर हल्के टेक्सचर में ज़्यादा आराम महसूस करती है।
क्या ऑयली स्किन को मॉइस्चराइज़र चाहिए?
हाँ। ऑयल और नमी अलग चीज़ें हैं: स्किन बहुत सीबम बना सकती है और फिर भी डिहाइड्रेटेड हो सकती है। जो ऑयली स्किन पिंपल की सुखाने वाली दवाएँ, सैलिसिलिक एसिड या रेटिनॉल इस्तेमाल करती है, वह मॉइस्चराइज़र के बिना जल्दी परेशान हो जाती है।
ऑयली स्किन के लिए कम ऑयल वाले, जेल या जेल-क्रीम टेक्सचर के "non-comedogenic" लिखे मॉइस्चराइज़र चुनें। हल्का मॉइस्चराइज़र भारीपन नहीं देता और बैरियर को सहारा देकर जलन कम करता है।
स्किन टाइप के हिसाब से टेक्सचर
- ऑयली और पिंपल-प्रवण स्किन: नियासिनामाइड, ग्लिसरीन या हायल्यूरोनिक एसिड वाला जेल या जेल-क्रीम
- कॉम्बिनेशन स्किन: हल्का लोशन या जेल-क्रीम; ज़रूरत हो तो सूखे हिस्सों पर थोड़ी भारी क्रीम
- नॉर्मल स्किन: लोशन या हल्की क्रीम
- ड्राई स्किन: सेरामाइड, कोलेस्ट्रॉल, फ़ैटी एसिड, स्क्वालेन या शिया वाली क्रीम
- बहुत ड्राई और पपड़ीदार स्किन: भरपूर क्रीम या बाम; 5–10% यूरिया वाले प्रोडक्ट
- सेंसिटिव और एक्ज़िमा-प्रवण स्किन: बिना ख़ुशबू, छोटी इंग्रीडिएंट लिस्ट, सेरामाइड और पैंथेनॉल वाली क्रीम
ख़रीदते समय क्या देखें
- ह्यूमेक्टेंट और बैरियर को सहारा देने वाला इंग्रीडिएंट, दोनों हों: जैसे ग्लिसरीन + सेरामाइड
- सेंसिटिव स्किन के लिए ख़ुशबू और एसेंशियल ऑयल न हों
- पिंपल-प्रवण स्किन के लिए "non-comedogenic" लिखा हो (गारंटी नहीं, पर अच्छी शुरुआत)
- सुबह के लिए SPF वाला मॉइस्चराइज़र चुनते हैं, तो याद रखें कि अलग सनस्क्रीन की जगह लेने के लिए इसे पर्याप्त मात्रा में लगाना होगा
- अगर आँखों के आसपास भी लगाएँगे तो बिना ख़ुशबू वाला, न चुभने वाला फ़ॉर्मूला
इस्तेमाल का तरीका
मॉइस्चराइज़र सीरम के बाद, जब स्किन अभी हल्की नम हो, लगाएँ; इससे पानी स्किन में बेहतर रुकता है। चेहरे और गर्दन के लिए आम तौर पर मटर से थोड़ी बड़ी मात्रा काफ़ी है। सुबह मॉइस्चराइज़र के बाद सनस्क्रीन लगाएँ; रात में मॉइस्चराइज़र आख़िरी स्टेप है।
सर्दियों में या एसी वाले कमरों में थोड़ी भारी क्रीम पर जाना और उमस भरे मौसम में हल्के टेक्सचर पर लौटना बिल्कुल सामान्य है। स्किन की ज़रूरतें मौसम के साथ बदलती हैं।
अगर स्किन बहुत ड्राई है, तो रात में मॉइस्चराइज़र के ऊपर सिर्फ़ सूखे हिस्सों पर पेट्रोलियम जेली या बैरियर मरहम की पतली परत (स्लगिंग) पानी की कमी काफ़ी घटाती है। पिंपल-प्रवण स्किन पर ऐसा न करें।
आम गलतियाँ
- ऑयली स्किन होने की वजह से मॉइस्चराइज़र पूरी तरह छोड़ देना
- परेशान स्किन पर तेज़ ख़ुशबू वाली या एक्टिव्स से भरी क्रीम लगाना
- पूरी तरह सूखी स्किन पर मॉइस्चराइज़र लगाना
- SPF वाले मॉइस्चराइज़र की पतली परत को पूरी धूप सुरक्षा समझना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नाइट क्रीम और डे क्रीम में क्या फ़र्क है?
डे क्रीम आम तौर पर हल्की होती है और कुछ में SPF होता है। नाइट क्रीम ज़्यादा भरपूर हो सकती है और उसमें रेटिनॉल जैसे रोशनी से प्रभावित होने वाले एक्टिव्स हो सकते हैं। ज़्यादातर लोगों के लिए सुबह-शाम एक ही मॉइस्चराइज़र इस्तेमाल करना बिल्कुल ठीक है।
क्या मॉइस्चराइज़र से पिंपल होते हैं?
भारी और चिकने टेक्सचर पिंपल-प्रवण स्किन पर परेशानी कर सकते हैं। हल्के, जेल टेक्सचर वाले "non-comedogenic" प्रोडक्ट आम तौर पर अच्छी तरह सहे जाते हैं; बल्कि रूखापन कम करके पिंपल के इलाज को जारी रखना आसान बनाते हैं।
क्या मॉइस्चराइज़र की जगह फ़ेस ऑयल लगा सकते हैं?
फ़ेस ऑयल इमोलिएंट और ऑक्लूसिव होते हैं, लेकिन इनमें पानी बाँधने वाले ह्यूमेक्टेंट नहीं होते। ड्राई स्किन में मॉइस्चराइज़र के ऊपर कुछ बूँद ऑयल डालना अच्छा है; उसकी जगह सिर्फ़ ऑयल लगाना ज़्यादातर स्किन के लिए काफ़ी नहीं।
मॉइस्चराइज़र कितने समय में असर करता है?
राहत तुरंत महसूस होती है। बैरियर का ठीक होना, यानी रूखापन, पपड़ी और सेंसिटिविटी का साफ़ तौर पर कम होना, आम तौर पर दो से चार हफ़्ते के नियमित इस्तेमाल में होता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, यह मेडिकल सलाह नहीं है। अगर आपको कोई स्किन की बीमारी है, आप गर्भवती हैं या नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो नया प्रोडक्ट शुरू करने से पहले अपने डर्मेटोलॉजिस्ट या फ़ार्मासिस्ट से सलाह लें।
आपके लिए कौन-से प्रोडक्ट सही हैं?
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